मौर्य साम्राज्य
साहित्यिक स्रोत :
01 . इंडिका :-
02. अर्थशास्त्र :-
चंद्रगुप्त मौर्य ( 322 BC - 298 BC )
* यह मौर्य वंश का प्रथम और संस्थापक माना जाता है |
* चंद्रगुप्त मौर्य के पिता " मोरिय वंश के क्षत्रिय सरदार थे |
* मुद्रा राक्षस और कथासरित सागर के अनुसार मौर्य वंश को शुद्र माना गया है |
* पुराणों के अनुसार नंदो को भी शुद्र माना गया है |
* ऐसा माना जाता है की , चंद्र गुप्त मौर्य " नंद " की पत्नी " मुरा " से पैदा हुई थी | जो की एक शुद्र वर्ण की थी |
* जस्टिन के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य एक निम्न कुल का राजा था |
* रोमिला थापर ने मौर्य शासकों को वैश्य की श्रेणी में रखा है |
* वर्ष 322 BC में चंद्र गुप्त मौर्य का राजतिलक किया जाता है |
* चंद्र गुप्त मौर्य ने 322 BC में ही पंजाब राज्य पर आक्रमण किया और वहा के राजा फिलिप की हत्या करके वहा का शासन अपने हाथ में ले लिया |
* पंजाब को जीतने के बाद उसने वर्ष 321 BC में मगध पर आक्रमण करता है और वहा के शासक घनानंद को हराकर उसे भी अपने अधिकार लेता है |
* चंद्रगुप्त मौर्य का प्रथम आक्रमण पंजाब पर था , जिसे जितने के बाद मगध पर आक्रमण किया था |
* 305 BC में सिकंदर का सेनापति " सेल्युकस निकेटर" ने भारत पर आक्रमण कर दिया , जिसके बाद सिंधु नदी के तट पर चंद्रगुप्त मौर्य और सेल्युकस निकेटर के बीच युद्ध हुआ ,जिसमे सेल्युकस निकेटर को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा ,हारने के बाद , सेल्युकस निकेटर और चंद्र गुप्त मौर्य के बीच एक संधि होती है जिसमे , सेल्युकस निकेटर ने अपनी पुत्री ( हेलना / कार्नेलिया ) का विवाह चंद्रगुप्त मौर्य से कर दिया और , दहेज में काबुल , कंधार , हेरात, और ब्लूचिस्तान दे दिया | और दोनो के बीच एक राजनयिक संबंध स्थापित हो गया |
* यूनानी राजदूत " मेगास्थनीज " चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में रहने लगा |
* चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु मैसूर में स्थित श्रवणबेलगोला जो की चंद्रगिरी पर्वत पर स्थित है , हुआ था |
* रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख से यह पता चलता है की , चंद्रगुप्त मौर्य के गवर्नर , " पुष्यगुप्त वैश्य " ने सौराष्ट्र में सुदर्शन झील का निर्माण करवाया था , जिसे अशोक के गवर्नर " तुशाष्प" ने उस सुदर्शन झील का पुनः उद्धार करवाया था |
( * एक मात्र ऐसा अभिलेख कौन सा है , जिसमे चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक दोनो का नाम एक साथ मिलता है = रुद्र दामन का जूनागढ़ अभिलेख )
* चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने आध्यात्मिक गुरु " भद्र बाहु से शिक्षा ग्रहण करके एवम उनसे प्रभावित होकर अपने जीवन के अंतिम क्षण में जैन धर्म को स्वीकार्य कर लिया |

Social Plugin