CISF जवान को लड़की बनकर बुलाया, मिंटो हॉस्टल में बनाया बंधक; खाते से करीब 3 लाख रुपये निकाले, 2 छात्र गिरफ्तार
पटना: बिहार की राजधानी पटना में CISF के एक जवान के साथ कथित तौर पर बंधक बनाकर मारपीट करने और उसके बैंक खाते से करीब 3 लाख रुपये का लेनदेन कराने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, जवान को पहले मोबाइल पर एक लड़की से बातचीत के जरिए मिलने के लिए बुलाया गया और इसके बाद उसे पटना विश्वविद्यालय के मिंटो हॉस्टल के एक कमरे में करीब दो दिनों तक रखा गया।
मामले में पटना विश्वविद्यालय से जुड़े दो छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों की पहचान हर्ष कुमार उर्फ धीरज कुमार और विकास कुमार उर्फ शुभंकर के रूप में हुई है। दोनों पर CISF जवान को बंधक बनाने और उसके बैंक खाते से पैसे निकालने का आरोप है।
पुलिस ने आरोपितों के पास से जवान का मोबाइल फोन, दो डेबिट कार्ड और 50 हजार रुपये नकद बरामद किए जाने की जानकारी दी है। वहीं जवान के खाते में बची करीब 1.88 लाख रुपये की राशि को होल्ड कराया गया है। मामले की जांच अभी जारी है।
महत्वपूर्ण नोट: इस खबर में आरोपितों के संबंध में दी गई जानकारी पुलिस और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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CISF जवान को कैसे बनाया गया निशाना?
पुलिस के अनुसार, CISF जवान पिछले कुछ समय से मोबाइल फोन पर एक लड़की से बातचीत कर रहा था। इसी बातचीत के दौरान उसे 15 अगस्त को मिलने के लिए पटना के पीरबहोर इलाके में बुलाया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, जवान जब बताए गए स्थान पर पहुंचा तो वहां दो युवक मिले। आरोप है कि इसके बाद दोनों उसे अपने साथ ले गए और पटना विश्वविद्यालय परिसर स्थित मिंटो हॉस्टल के एक कमरे में ले जाकर बंधक बना लिया।
कुछ रिपोर्टों में पुलिस जांच के हवाले से यह भी बताया गया है कि आरोपितों में से एक ने कथित तौर पर लड़की बनकर मैसेंजर के जरिए जवान से संपर्क किया था। हालांकि, इस पूरे डिजिटल संपर्क की विस्तृत जानकारी पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मिंटो हॉस्टल में करीब दो दिन रखा गया
जवान की शिकायत के अनुसार, उसे मिंटो हॉस्टल के एक कमरे में करीब 48 घंटे तक रखा गया।
आरोप है कि इस दौरान उसके साथ मारपीट और डराने-धमकाने की गई तथा उसका मोबाइल फोन और बैंक से जुड़े डेबिट कार्ड अपने कब्जे में ले लिए गए।
पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान जवान के बैंक खातों से करीब 3 लाख रुपये की निकासी या लेनदेन किया गया। पुलिस अब बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय जानकारी के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किस तरह निकाली या ट्रांसफर की गई।
खाते से करीब 3 लाख रुपये का लेनदेन
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जवान के बैंक खाते से हुई कथित आर्थिक निकासी है।
पुलिस के अनुसार, आरोपितों ने जवान के बैंक से संबंधित कार्ड अपने कब्जे में लेने के बाद उसके खाते से करीब 3 लाख रुपये का लेनदेन कराया।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए खाते में बची लगभग 1.88 लाख रुपये की राशि को होल्ड कराया है। इसके अलावा आरोपितों के पास से 50 हजार रुपये नकद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बैंक ट्रांजेक्शन की जांच
अब पुलिस बैंक खाते की पूरी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि रकम कब, किस माध्यम से और किस खाते या स्थान पर भेजी गई।
जांच में ATM transaction, बैंक transfer, डिजिटल भुगतान और अन्य वित्तीय गतिविधियों की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
मौका मिलते ही CISF जवान हॉस्टल से भाग निकला
मामले में 17 अगस्त को बड़ा मोड़ आया।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपित किसी समय कमरे का दरवाजा खुला छोड़कर पानी पीने के लिए बाहर चले गए। इसी दौरान CISF जवान को वहां से निकलने का मौका मिला।
जवान हॉस्टल से निकलकर सीधे पीरबहोर थाना पहुंचा और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।
जवान की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और आरोपितों की तलाश के लिए टीम गठित की।
शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
जवान के थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने कथित घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच शुरू की। आरोपितों की पहचान और उनके संभावित ठिकानों का पता लगाने के लिए पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों का इस्तेमाल किया।
मामले में मोबाइल फोन, बैंक ट्रांजेक्शन, डेबिट कार्ड और हॉस्टल से जुड़े तथ्यों को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना में केवल दो लोग शामिल थे या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।
23 अगस्त की रात दोनों आरोपित गिरफ्तार
पुलिस की कार्रवाई का परिणाम 23 अगस्त की रात सामने आया। पुलिस के अनुसार, टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपितों के नाम
- हर्ष कुमार उर्फ धीरज कुमार
- विकास कुमार उर्फ शुभंकर
पुलिस पूछताछ में मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
दोनों आरोपित पटना विश्वविद्यालय से जुड़े छात्र
पुलिस जांच में दोनों आरोपितों के पटना विश्वविद्यालय से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हर्ष कुमार विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में पढ़ाई कर रहा था, जबकि विकास कुमार का संबंध पटना कॉलेज से बताया गया है। दोनों के हॉस्टल में रहने की जानकारी भी सामने आई है।
घटना में छात्रावास का इस्तेमाल किए जाने के कारण इस मामले में हॉस्टल से संबंधित पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
आरोपितों के पास से क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपितों के पास से कई सामान बरामद किए जाने की जानकारी दी है।
1. CISF जवान का मोबाइल फोन
पुलिस के अनुसार, जवान का मोबाइल फोन आरोपितों के पास से बरामद किया गया। यह मोबाइल कथित घटना से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
2. दो डेबिट कार्ड
जवान के दो डेबिट या ATM कार्ड भी बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन्हीं कार्डों से बैंक खाते से पैसे निकालने की जांच की जा रही है।
3. 50 हजार रुपये नकद
पुलिस ने आरोपितों के पास से 50 हजार रुपये नकद बरामद किए जाने का दावा किया है।
4. खाते में बची राशि होल्ड
पुलिस के अनुसार, जवान के बैंक खाते में बची करीब 1.88 लाख रुपये की राशि को तत्काल होल्ड कराया गया है।
CISF जवान की पहचान और तैनाती
मीडिया रिपोर्टों में पीड़ित जवान की पहचान नवीज कुमार/नाबिज कुमार के रूप में अलग-अलग spelling के साथ दी गई है। वे मूल रूप से दरभंगा जिले के निवासी बताए गए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान में उनकी तैनाती CISF पूर्वी क्षेत्र मुख्यालय, पटना में GD आरक्षी के पद पर है।
चूंकि उपलब्ध रिपोर्टों में नाम की spelling अलग-अलग दिखाई देती है, इसलिए आधिकारिक दस्तावेज सामने आने तक नाम को लेकर सावधानी रखना उचित है।
लड़की बनकर बातचीत करने का आरोप
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित तौर पर ऑनलाइन बातचीत से जुड़ा है।
पुलिस जांच के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपित ने कथित तौर पर लड़की की पहचान का इस्तेमाल करके CISF जवान से मैसेंजर के जरिए बातचीत की और उसे मिलने के लिए बुलाया।
इसके बाद जवान को कथित तौर पर मिंटो हॉस्टल ले जाया गया। हालांकि, इस पूरे मामले में डिजिटल बातचीत और प्रोफाइल से संबंधित वास्तविक तथ्य पुलिस जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होंगे।
क्या इस मामले में और लोग भी शामिल हैं?
फिलहाल पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, जांच अभी पूरी नहीं हुई है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी या नहीं।
जांच में विशेष रूप से इन सवालों के जवाब तलाशे जा सकते हैं:
- जवान से ऑनलाइन संपर्क किसने किया?
- लड़की की पहचान या प्रोफाइल किसने इस्तेमाल की?
- जवान को मिलने के लिए किसने बुलाया?
- उसे मिंटो हॉस्टल तक कैसे ले जाया गया?
- बैंक खाते से रकम किस माध्यम से निकाली गई?
- निकाली गई रकम कहां गई?
- क्या घटना में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था?
- क्या इसी तरीके से पहले किसी अन्य व्यक्ति को निशाना बनाया गया?
विकास कुमार के पुराने रिकॉर्ड की भी जांच
कुछ मीडिया रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि गिरफ्तार आरोपित विकास कुमार का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस कथित तौर पर उसके पुराने मामलों और वर्तमान घटना के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है।
हालांकि, किसी पुराने मामले में नाम आने मात्र से वर्तमान मामले में दोष सिद्ध नहीं होता। इसलिए इस जानकारी को भी पुलिस जांच के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
बैंकिंग फ्रॉड के मामले में पुलिस की कार्रवाई
इस मामले में बैंक खाते में बची राशि को होल्ड कराने की कार्रवाई महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति के बैंक खाते से अनधिकृत transaction हो जाए तो तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना देना जरूरी होता है।
जवान के मामले में खाते में बची करीब 1.88 लाख रुपये की राशि को होल्ड कराया गया है। अब पुलिस कथित तौर पर बैंक रिकॉर्ड के जरिए पूरी रकम के लेनदेन की जांच कर रही है।
CISF जवानों के लिए भी महत्वपूर्ण सुरक्षा संदेश
यह घटना सोशल मीडिया और ऑनलाइन बातचीत के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को भी सामने लाती है। किसी अनजान व्यक्ति से मिलने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी है।
- अनजान व्यक्ति से मिलने के लिए अकेले न जाएं।
- पहली मुलाकात सार्वजनिक स्थान पर करें।
- किसी भरोसेमंद व्यक्ति को मुलाकात की जानकारी दें।
- ATM PIN और OTP किसी के साथ साझा न करें।
- डेबिट या क्रेडिट कार्ड किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
- संदिग्ध बैंक transaction होने पर तुरंत बैंक को सूचित करें।
- ऑनलाइन प्रोफाइल की वास्तविक पहचान की पुष्टि करें।
पुलिस की जांच में मोबाइल फोन अहम कड़ी
आरोपितों के पास से मोबाइल फोन बरामद होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में मोबाइल फोन और उसमें मौजूद डिजिटल जानकारी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
पुलिस आवश्यकता के अनुसार कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, मैसेंजर चैट, लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इससे कथित घटना से पहले और बाद की गतिविधियों की जानकारी मिल सकती है।
बैंक ट्रांजेक्शन से खुल सकते हैं कई राज
जवान के खाते से करीब 3 लाख रुपये के लेनदेन का आरोप है। इसलिए बैंकिंग रिकॉर्ड इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Transaction history से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि पैसे किस समय निकाले गए, किस माध्यम का इस्तेमाल किया गया और रकम किस खाते या व्यक्ति तक पहुंची।
यदि किसी अन्य बैंक खाते में रकम ट्रांसफर हुई है, तो पुलिस उस खाते से जुड़े व्यक्ति की भी जांच कर सकती है।
मिंटो हॉस्टल की भूमिका भी जांच के घेरे में
कथित घटना के दौरान जवान को मिंटो हॉस्टल के एक कमरे में रखे जाने की बात सामने आई है। इसलिए पुलिस हॉस्टल से जुड़े रिकॉर्ड और घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों की जानकारी भी जुटा सकती है।
हॉस्टल परिसर में उपलब्ध CCTV फुटेज, प्रवेश और निकास से जुड़े रिकॉर्ड तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्य जांच में मददगार हो सकते हैं।
15 से 23 अगस्त तक क्या हुआ?
15 अगस्त
पुलिस के अनुसार, CISF जवान को मिलने के लिए बुलाया गया और इसके बाद कथित तौर पर उसे बंधक बना लिया गया।
15 से 17 अगस्त
जवान को मिंटो हॉस्टल में रखने और उसके बैंक खाते से करीब 3 लाख रुपये के लेनदेन का आरोप है।
17 अगस्त
आरोपितों के कमरे से बाहर जाने के दौरान जवान वहां से निकल गया और पीरबहोर थाना पहुंचा।
17 अगस्त के बाद
पुलिस ने शिकायत दर्ज कर आरोपितों की तलाश और मामले की जांच शुरू की।
23 अगस्त
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के बाद
पुलिस ने मोबाइल फोन, दो डेबिट कार्ड और 50 हजार रुपये नकद बरामद किए जाने की जानकारी दी। साथ ही खाते में बची करीब 1.88 लाख रुपये की राशि को होल्ड कराया गया।
मामले में अब आगे क्या होगा?
दोनों आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। जांच में बैंक transactions, मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड, हॉस्टल से जुड़े साक्ष्य और कथित ऑनलाइन बातचीत की पड़ताल की जा सकती है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि क्या इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी। यदि जांच के दौरान कोई नया तथ्य सामने आता है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
निष्कर्ष
पटना में CISF जवान को बंधक बनाने और उसके बैंक खाते से करीब 3 लाख रुपये के लेनदेन का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने पटना विश्वविद्यालय से जुड़े दो छात्रों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, जवान को पहले मोबाइल पर एक लड़की से बातचीत के जरिए मिलने के लिए बुलाया गया। इसके बाद उसे कथित तौर पर मिंटो हॉस्टल के एक कमरे में करीब दो दिनों तक रखा गया। इस दौरान उसका मोबाइल फोन और दो डेबिट कार्ड कथित तौर पर अपने कब्जे में ले लिए गए।
17 अगस्त को जवान मौका पाकर हॉस्टल से निकलने में सफल रहा और पीरबहोर थाना पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और 23 अगस्त की रात दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपितों के पास से मोबाइल फोन, दो डेबिट कार्ड और 50 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। वहीं खाते में बची करीब 1.88 लाख रुपये की राशि को होल्ड कराया गया है।
मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित घटना में केवल दो लोग शामिल थे या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।
नोट: गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। उन्हें अदालत के अंतिम निर्णय से पहले दोषी नहीं माना जाना चाहिए।

