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बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया रेल लाइन दोहरीकरण: बिहार में रेलवे अवसंरचना को मिलेगी नई रफ़्तार .

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 बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया रेल लाइन दोहरीकरण:

बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया रेल लाइन दोहरीकरण. dailyprime247.com

बिहार रेल अवसंरचना विकास:

25 सितम्बर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने बिहार की बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया रेल लाइन (104 किमी) के दोहरीकरण को मंजूरी दी। यह निर्णय न ,केवल बिहार की रेलवे अवसंरचना के लिए बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। लगभग ₹2,192 करोड़ की लागत से बनने वाली यह परियोजना माल परिवहन, क्षेत्रीय संपर्क और लॉजिस्टिक्स दक्षता में बड़ा बदलाव लाने वाली है। यह कदम पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत उठाया गया है, जो मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और लॉजिस्टिक्स लागत घटाने पर केंद्रित है।

भारत की अर्थव्यवस्था आज तेजी से विकास कर रही है और इस विकास की रीढ़ है, परिवहन अवसंरचना। रेलवे, सड़क और हवाई मार्ग का तालमेल इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिहार जैसे राज्य, जहाँ कृषि, खनिज और पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं, वहाँ रेल नेटवर्क का विस्तार और आधुनिकीकरण राज्य की आर्थिक क्षमता को दोगुना कर सकता है। यही कारण है कि इस परियोजना को एक रणनीतिक और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया रेल लाइन परियोजना 

बिंदु विवरण

  • परियोजना बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया लाइन दोहरीकरण
  • कुल दूरी 104 किमी
  • लागत ₹2,192 करोड़ (लगभग)
  • कवर ज़िले बिहार के 4 ज़िले
  • लाभान्वित गाँव लगभग 1,434
  • लाभान्वित आबादी लगभग 13.46 लाख
  • आकांक्षी ज़िले गया और नवादा

बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया लाइन की प्रमुख विशेषताएँ

  • यह लाइन वर्तमान में एकल ट्रैक पर संचालित है।
  • परियोजना पूरी होने पर यात्री और मालगाड़ियों की संख्या और गति दोनों में वृद्धि होगी।
  • कनेक्टिविटी बेहतर होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा।

किस किस ज़िला को कनेक्ट करेगी :

पटना और नालंदा: राज्य की राजधानी पटना के समीप होने से यात्रियों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी होगी।

गया और नवादा: दोनों आकांक्षी ज़िले हैं, जहाँ तेज़ विकास की संभावना है।

रणनीतिक महत्त्व

1. माल परिवहन व आर्थिक दक्षता

  • भारतीय रेल राष्ट्रीय माल परिवहन का लगभग 27% हिस्सा संभालती है। लेकिन अभी भी कई सेक्टरों में सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता बनी हुई है। इस परियोजना से:
  • 26 MTPA (मिलियन टन प्रति वर्ष) अतिरिक्त क्षमता विकसित होगी।
  • कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, फ्लाई ऐश और कृषि उपज का परिवहन तेज़ और कम लागत वाला होगा।
  • औद्योगिक क्षेत्रों को बाज़ार तक सीधी पहुँच मिलेगी।
  • भीड़भाड़ वाले मार्गों जैसे हावड़ा–दिल्ली मुख्य लाइन पर दबाव घटेगा।

2. पर्यावरणीय लाभ

  • रेल परिवहन, सड़क परिवहन की तुलना में ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल है। इस परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव:
  • तेल आयात में 5 करोड़ लीटर की बचत।
  • 24 करोड़ किग्रा CO₂ उत्सर्जन में कमी।
  • यह लगभग 1 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
  • सड़क पर भारी ट्रकों की संख्या घटेगी, जिससे वायु और ध्वनि प्रदूषण में भी कमी होगी।

3. क्षेत्रीय संपर्क और पर्यटन

  • राजगीर और नालंदा जैसे शैक्षणिक और ऐतिहासिक स्थलों की पहुँच आसान होगी।
  • गया और नवादा जैसे ज़िलों में शिक्षा और उद्योग निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • बेहतर रेल कनेक्टिविटी से बिहार की छवि निवेशकों के लिए आकर्षक बनेगी।

4. सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

  • 13.46 लाख लोगों को सीधा लाभ।
  • किसानों को अपनी उपज समय पर और सस्ती दरों पर बाज़ार तक पहुँचाने में मदद।
  • ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर।
  • आकांक्षी ज़िलों का संतुलित विकास।

प्रधानमंत्री मोदी रेलवे प्रोजेक्ट

  • लॉन्च: 13 अक्टूबर 2021।
  • उद्देश्य: विभिन्न अवसंरचना परियोजनाओं का एकीकृत तालमेल।

लाभ:

  • लॉजिस्टिक्स लागत कम करना।
  • परिवहन अवसंरचना की योजना में देरी घटाना।
  • राष्ट्रीय स्तर पर मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा।

🔗 PIB - पीएम गति शक्ति पर आधिकारिक जानकारी

🔗 नीति आयोग - आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम

🔗 रेल मंत्रालय - आधिकारिक वेबसाइट

परीक्षा उपयोगी  तथ्य :

  • परियोजना: बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया लाइन दोहरीकरण (104 किमी)
  • लागत: ₹2,192 करोड़
  • लाभ: 26 MTPA अतिरिक्त माल परिवहन, 13.46 लाख आबादी को लाभ
  • कवरेज: 4 ज़िले, 1,434 गाँव
  • भारतीय रेल नेटवर्क लंबाई: 68,000 किमी+ (2023 तक)
  • माल परिवहन में भारतीय रेल का हिस्सा: लगभग 27%
  • आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम लॉन्च: जनवरी 2018 (नीति आयोग)

भारतीय रेल का वर्तमान परिदृश्य

  • भारत का रेल नेटवर्क दुनिया का चौथा सबसे बड़ा है।
  • कुल लंबाई: 68,000 किमी से अधिक।
  • भारतीय रेल हर दिन लगभग 2.3 करोड़ यात्रियों और 3.5 मिलियन टन माल का परिवहन करती है।
  • चुनौती: पुराना बुनियादी ढाँचा, भीड़भाड़ और सीमित क्षमता।

बिहार की परिवहन स्थिति

  • बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और खनिज आधारित है।
  • सड़क नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव है।
  • रेलवे अवसंरचना के विकास से:
  • कृषि उत्पादों की बेहतर आवाजाही।
  • खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों तक बेहतर पहुँच।

लॉजिस्टिक्स और प्रतिस्पर्धात्मकता

  • भारत में लॉजिस्टिक्स लागत GDP का लगभग 13-14% है।
  • विकसित देशों में यह लागत 8-9% है।
  • इस परियोजना से लॉजिस्टिक्स लागत घटकर 9-10% तक आ सकती है।
  • आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम से सामंजस्य
  • लॉन्च: जनवरी 2018।
  • उद्देश्य: शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आधारभूत संरचना और कौशल विकास में सुधार।
  • गया और नवादा जैसे ज़िले इस परियोजना से सीधा लाभ पाएंगे।

FAQs

Q1. बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया रेल लाइन दोहरीकरण की लंबाई कितनी है?

Ans. कुल लंबाई 104 किमी है।

Q2. इस परियोजना की कुल लागत कितनी है?

Ans. लगभग ₹2,192 करोड़।

Q3. कितने गाँव और आबादी को लाभ मिलेगा?

Ans. लगभग 1,434 गाँव और 13.46 लाख लोग लाभान्वित होंगे।

Q4. इस परियोजना से पर्यावरणीय लाभ क्या होंगे?

Ans. तेल आयात में 5 करोड़ लीटर की बचत और CO₂ उत्सर्जन में 24 करोड़ किग्रा की कमी।

Q5. यह परियोजना किस राष्ट्रीय योजना का हिस्सा है?

Ans. पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान।

Q6. आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम कब लॉन्च किया गया था?

Ans. जनवरी 2018 में नीति आयोग द्वारा।

MCQs (परीक्षा के लिए)

Q1. बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना की लागत कितनी है?

(a) ₹1,865 करोड़

(b) ₹2,192 करोड़

(c) ₹2,500 करोड़

(d) ₹1,500 करोड़

👉 उत्तर: (b)

Q2. इस परियोजना से कितने गाँव लाभान्वित होंगे?

(a) 1,234

(b) 1,434

(c) 2,000

(d) 1,046

👉 उत्तर: (b)

Q3. इस परियोजना से अतिरिक्त माल परिवहन क्षमता कितनी होगी?

(a) 15 MTPA

(b) 20 MTPA

(c) 26 MTPA

(d) 30 MTPA

👉 उत्तर: (c)

Q4. पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान कब लॉन्च किया गया था?

(a) अक्टूबर 2019

(b) अक्टूबर 2021

(c) जनवरी 2018

(d) मार्च 2020

👉 उत्तर: (b)

Q5. आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम किसके द्वारा संचालित है?

(a) वित्त मंत्रालय

(b) रेल मंत्रालय

(c) नीति आयोग

(d) गृह मंत्रालय

👉 उत्तर: (c)

निष्कर्ष

बख्तियारपुर–राजगीर–टिलैया रेल लाइन का दोहरीकरण बिहार की आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टि से एक गेम-चेंजर परियोजना है। यह न केवल माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाएगी बल्कि क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाएगी। UPSC, BPSC, SSC और Banking जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह विषय महत्वपूर्ण करंट अफेयर्स और स्थिर तथ्य दोनों के रूप में उपयोगी है।

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