दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद 110 CISF जवानों को नहीं मिला HRA, अवमानना याचिका की तैयारी|
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के कर्मियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाए जाने के बावजूद, जवानों को अपनी बकाया राशि के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देश और तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी लगभग 110 CISF जवानों को हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की बकाया राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। विभाग की इस देरी के कारण जवानों में भारी असंतोष है और वे अब विभाग के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के करीब 110 जवान इन दिनों एक अजीब स्थिति से जूझ रहे हैं — अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुना दिया, फिर भी उन्हें अपने हक का पैसा नहीं मिल पाया है। मामला हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़ी बकाया राशि का है, जिसके भुगतान में देरी को लेकर अब प्रभावित जवान अदालत की अवमानना (कंटेम्प्ट) की कार्यवाही शुरू करने पर विचार कर रहे हैं।
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| High Court Delhi. |
विवाद की जड़ क्या है ?
यह मामला रिट याचिका संख्या 8154/2024 (आशीष शर्मा बनाम भारत संघ एवं अन्य) और इससे जुड़ी अन्य याचिकाओं से निकला है। रिपोर्ट के मुताबिक, 21 मई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने इन जवानों के पक्ष में फैसला देते हुए निर्देश दिया था कि उन्हें पूरा 30 प्रतिशत HRA दिया जाए। इससे पहले जवानों के HRA में से 5 प्रतिशत की कटौती की गई थी, और अदालत ने इस कटी हुई राशि को तीन महीने के भीतर लौटाने का आदेश दिया था।
समस्या यह है कि तीन महीने की यह समयसीमा बीत जाने के बाद भी संबंधित जवानों के खाते में बकाया राशि नहीं पहुंची है — जबकि अदालत का आदेश स्पष्ट था।
जवानों में नाराजगी क्यों बढ़ रही है
प्रभावित कर्मियों का कहना है कि उन्होंने अपने अधिकार के लिए विधिवत अदालत का रास्ता चुना, राहत भी मिली, लेकिन आदेश लागू करने में हो रही देरी की वजह से उन्हें अब भी इंतजार करना पड़ रहा है। कानूनी हलकों का मानना है कि जब किसी अदालती आदेश का तय समय में पालन नहीं होता, तो प्रभावित पक्ष के पास अवमानना याचिका दायर करने का विकल्प खुला रहता है — हालांकि इसके लिए आदेश की शर्तों और गैर-अनुपालन की स्थिति का बारीकी से कानूनी परीक्षण जरूरी होता है।
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क्या है पूरा मामला? (Case Background)
यह मामला रिट याचिका (सिविल) संख्या 8154/2024 (आशीष शर्मा बनाम भारत संघ एवं अन्य) तथा इससे जुड़ी अन्य याचिकाओं से संबंधित है।
अदालत का फैसला: 21 मई 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने CISF कर्मियों के हक में फैसला सुनाते हुए उन्हें पूर्ण HRA (30 प्रतिशत HRA) दिए जाने का स्पष्ट निर्देश दिया था।
कटौती की भरपाई: अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि HRA के नाम पर पूर्व में काटी गई 5 प्रतिशत राशि का भुगतान तीन महीने (3 Months) के भीतर किया जाए।
तय सीमा समाप्त: निर्धारित 3 महीने की समय सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन प्रभावित जवानों को उनकी जायज बकाया राशि का भुगतान अभी तक नहीं मिल सका है।
आगे क्या हो सकता है
बताया जा रहा है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो प्रभावित 110 जवान दिल्ली हाईकोर्ट में अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर विचार कर सकते हैं। ऐसे में सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि CISF प्रशासन कब तक बकाया राशि जारी करता है। भुगतान में और देरी होने पर यह मामला दोबारा अदालत के समक्ष पहुंच सकता है, जिससे आगे और कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
अधिक जानकारी और स्रोत के लिए
दिल्ली हाईकोर्ट — आधिकारिक वेबसाइट (केस स्टेटस व आदेश)
CISF — आधिकारिक वेबसाइट
गृह मंत्रालय, भारत सरकार- Official Website.
अवमानना याचिका (Contempt of Courts Act) के बारे में सामान्य जानकारी — India Code
नोट: यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। केस की सटीक स्थिति और आदेश की मूल प्रति के लिए पाठकों को दिल्ली हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर केस नंबर से स्थिति जांचने की सलाह दी जाती है।
अब जवानों के पास क्या है कानूनी रास्ता?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी भी अदालत या उच्च न्यायालय (High Court) के स्पष्ट आदेश का तय समय सीमा में पालन नहीं किया जाता है, तो पीड़ित पक्ष के पास कानूनन यह अधिकार होता है:
अवमानना याचिका (Contempt Petition): प्रभावित पक्ष अदालत के आदेश की अनदेखी करने पर संबंधित विभाग या अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई शुरू कर सकता है।
कानूनी परीक्षण: अवमानना की याचिका दायर करने से पहले अदालत के आदेश की शर्तों और अनुपालन की वर्तमान स्थिति का सटीक कानूनी विश्लेषण किया जाएगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि CISF प्रशासन कब तक अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए जवानों की बकाया HRA राशि जारी करता है। यदि भुगतान में और अधिक विलंब होता है, तो यह मामला एक बार फिर दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष गर्मा सकता है।
📌 Quick Highlights / SEO Summary Block:
मामला: CISF जवानों का HRA बकाया मामला
कोर्ट का नाम: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
याचिका संख्या: W.P.(C) 8154/2024 (आशीष शर्मा बनाम भारत संघ)
कोर्ट का आदेश तिथि: 21 मई 2026
मुख्य बिंदु: 30% HRA भुगतान और 5% पूर्व कटौती की 3 महीने में वापसी
वर्तमान स्थिति: 3 महीने बीतने पर भी भुगतान न होने से अवमानना याचिका की तैयारी


